साफ नीति नहीं होने से प्याज निर्यात ठप, बाजार में प्याज की आवक बढ़ी, किसानों को नहीं मिल रहा भाव

इंडिया फर्स्ट ब्यूरो। बाजार में लाल प्याज की आवक बढ़ गई है लेकिन सरकार की ओर से प्याज निर्यात को लेकर कोई स्पष्ट नीति तय नहीं की जा रही है. इससे बाजार में प्याज का भाव गिर गया है. प्याज उत्पादक किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है. सोलापुर बाजार समिति में 1200 ट्रक से ज्यादा आवक हुई है. रिटेल और थोक बाजारों में लाल प्याज की आवक तेजी से बढ़ी है. लेकिन फिलहाल प्याज के निर्यात की अनुमति नहीं है. इस वजह से प्याज का भाव लगातार गिर रहा है. इससे महाराष्ट्र में  किसानों को  उनके उत्पाद का सही भाव नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में किसान की केंद्र सरकार से मांग है कि प्याज  निर्यात की अनुमति दे ताकि उन्हें अपने उत्पाद का सही भाव मिले. महाराष्ट्र के प्याज की क्वालिटी अच्छी होने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में यह थोड़ा महंगा है. खाड़ी के देशों में इसकी अच्छी मांग है. इसलिए निर्यात को अनुमति दी जाती है तो किसानों को अच्छा भाव मिलने की उम्मीद है|

पिछले साल के मुकाबले इस बार किसानों ने गर्मियों में उगाए जाने वाले प्याज की 25 से 30 फीसदी ज्यादा उत्पादन किया. गर्मियों में उगाया जाने वाला प्याज पुणे और नासिक के किसानों द्वारा बड़ी मात्रा में तैयार किया जाता है. दिसंबर महीने में हुई बेमौसम बरसात की वजह से नए प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा. इसके बाद जो प्याज उगाया गया उसकी फसल अच्छी हुई. इस वजह से बाजार में नए प्याज की आवक तेजी से बढ़ गई. फिलहाल बाजारों में प्याज की बहुतायत है |

पिछले साल फरवरी महीने में प्रति दस किलो पर प्याज को 350 रुपए का भाव मिला. फुटकर बाजार में इस वक्त एक किलो प्याज 20 से 35 रुपए में मिल रहा है. इस बार अच्छे प्याज को प्रति दस किलो 200 से 230 रुपए की दर मिली है. मध्यम स्तर के प्याज को प्रति दस किलो 150 से 200 रुपए की दर मिल रही है. यह पिछले साल के मुकाबले काफी कम है.बता दें कि भारत में सबसे अधिक प्याज महाराष्ट्र के किसान उपजाते हैं और नासिक के पास लासलगांव में प्याज की सबसे बड़ी मंडी है. पिछले कई महीनों से प्याज उत्पादक किसान परेशान हैं. कभी बेमौसम बरसात से प्याज सड़ जाता है. कभी प्याज की कमी को पूरा करने के लिए प्याज की आयात करनी पड़ती है. फिर बाजार में प्याज उपलब्ध होने की वजह से  किसानों की तैयार फसल को सही भाव नहीं मिल पाता है. जब फसल ज्यादा होती है और बाजार में उसकी मांग भी होती है तो निर्यात पर रोक से किसानों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं| indiafirst.online

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