
इंडिया फ़र्स्ट ब्यूरो । भोपाल ।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह अपने बयानों को लेकर हिन्दुवादी संगठनों के निशाने पर रहते आये हैं लेकिन भोपाल में अपनी नर्मदा यात्रा पर आधारित पुस्तक के विमोचन के अवसर पर, उनका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और अमित शाह की प्रशंसा करना, क्या सिर्फ़ एक आभार का व्यक्त करना मात्र है या फिर इसके कई मायने है । ख़ास तौर पर ऐसे समय में जब पंजाब कांग्रेस सहित पूरी कांग्रेस पार्टी में उथल पुथल मची है, इस दौरान दिग्विजय सिंह जैसे तेज दिमाग़ राजनेता के इन तारीफ़ों के शब्दों के निहितार्थ समझना जरुरी है ।
दरअसल जिस तरह से राहुल गांधी एक के बाद एक कांग्रेस के सीनियर नेताओं को दरकिनार कर रहे है उससे पार्टी के भीतर इन नेताओं में बेचैनी साफ़ देखी जा सकती है । हालाँकि दिग्विजय सिंह तमाम उतार चढ़ाव के बाद , दस जनपथ से अपने लिये कोई ना कोई भूमिका निकलवा ही लेते हैं .. लेकिन भविष्य किसने देखा है । जो हाल कैप्टन अमरिंदर का, कपिल सिब्बल का, मनीष तिवारी का हो रहा है उसकी जद में कभी भी कोई भी आ सकता है । ऐसे में अमित शाह और संघ की तारीफ़ कर के .. दिग्विजय सिंह ने कम से कम ये तो जता ही दिया है कि उनकी ना तो संघ और ना ही भाजपा के चाणक्य शाह से कोई निजी शत्रुता है । इस संकेत से उन्होंने अपनी कांग्रेस पार्टी को भी ये जता दिया है कि .. वे कथित हिन्दू विरोधी विवादित बयानों के तीर सिर्फ़ पार्टी और पार्टी हाईकमान के लिये छोड़ते आये है .. उनका व्यक्तिगत किसी से ( भगवा बिग्रेड ) से कोई बैर नहीं ।
अब दिग्गी राजा के ये संकेत , कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को कितना समझ आते हैं ये तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन इतना तो साफ़ है कि कांग्रेस में सीनियर नेताओं को अपने अस्तित्व को बचाने के लिये सबसे बड़े संघर्षों से होकर गुजरना पड़ रहा है । indiafirst.online