
इंडिया फर्स्ट। इंटरनेशनल डेस्क।
बदहाली के शिकार पाक में हुकूमत ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली. उसने पेट्रोल और गेहूं के आटे पर सब्सिडी का ऐलान किया. IMF ने सवाल उठाए हैं, कर्ज मिलना और मुश्किल हुआ.
आर्थिक बदहाली का शिकार पाकिस्तान अपने हालात सुधारने के लिए विदेशी फंड चाहता है. इसके लिए वहां की हुकूमत ने इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से गुहार लगाई थी. IMF ने पाकिस्तानी हुकूमत को कहा था कि वे एक देश की तरह बर्ताव करना सीखें और एकत्रित रकम को सब्सिडी जैसी सुविधाओं में उठाने से बचें. मगर, कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है.
पाकिस्तानी हुकूमत ने अपने यहां पेट्रोल और गेहूं के आटे पर सब्सिडी का ऐलान किया है, जिससे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने नाराजगी जाहिर की है. IMF ने शहबाज शरीफ की हुकूमत के ईंधन पर सब्सिडी देने की मंशा पर सवाल उठाया है और कहा है कि इस बारे में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई थी. IMF के ऐतराज जताने पर अब इस वैश्विक एजेंसी से पाकिस्तान को आर्थिक पैकेज मिलने की संभावना धूमिल हो गई है.
शहबाज हुकूमत ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली!
पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पाकिस्तानी हुकूमत ने मुल्क में अरबों रुपये की पेट्रोल सब्सिडी का ऐलान किया है. इसके अलावा वो 73 अरब रुपये की सब्सिडी गेहूं के आटे पर देने जा रही है. बताया जा रहा है कि हुकूमत अब 800 सीसी की कार और मोटरसाइकिल रखने वाले लोगों को पेट्रोल पर 50 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देगी. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जबकि चीन ने उसे करोड़ों डॉलर का लोन देने का ऐलान किया. सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि IMF ने शहबाज शरीफ की हुकूमत की पेट्रोल योजना को फाइनेंस करने के स्रोत के बारे में भी सवाल किया है.
IMF ने यह भी जानना चाहा है कि उनकी हुकूमत सब्सिडी योजना को किस तरह से लागू करेगी. IMF के अधिकारियों को इस बात पर ऐतराज है कि एक ओर पाकिस्तानी हुकूमत दुनिया के देशों से कर्ज मांग रही है, वहीं उसके लिए जरूरी कदम नहीं उठाए जा रहे. मसलन, पाकिस्तानी हुकूमत ने अपनी फ्यूल सब्सिडी के बारे में IMF से कोई सलाह नहीं ली. यह सब भी तब किया, जबकि पाकिस्तान पर 100 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है.
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