
इंंडिया फर्स्ट । जयपुर ।
एक के बाद एक अपने विश्वसनीय सहयोगियों को खोने वाली कांग्रेस को अब राजस्थान को लेकर डर सताने लगा है। देस की ग्रांड ओल्ड पार्टी से युवा चेहरो का मोह भंग होना, कांग्रेस आलाकमान को लगातार खटक रहा है। कभी राहुल गांधी के कोर ग्रुप में रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद जैसे युवा नेता पार्टी को छोड़कर भाजपा का कमल थाम चुके है, ऐसे में राहुल गांधी के दोस्त और सीएम इन वेटिंग माने जाने वाले सचिन पायलट को लेकर, राहुल गांधी के एक बयान ने सियासी अटकलों को एक बार फिर हवा दे दी है। दरअसल बीते दिन दिल्ली में कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस धैर्य सिखाती है। इस दौरान राहुल गांधी ने सब्र रखने में खुद की बात करने के साथ सचिन पायलट का भी उदाहरण दे गए।
उन्होंने कहा कि देखिये सचिन पायलट जी बैठे हुए हैं। सिद्धारमैया बैठे हैं, रणदीप बैठे हैं, सब पेशेंस से बैठे हैं। ये हमारी जो पार्टी है, यह हमें थकने नहीं देती है। यह रोज पेशेंस सिखाती है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी का सब्र के उदाहरण में सचिन पायलट का नाम लेना सियासी रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सियासी संकट के बाद जुलाई 2020 के बाद से पायलट बिना पद के काम कर रहे हैं। 14 जुलाई 2020 को सचिन पायलट को डिप्टी सीएम और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष से हटा दिया गया था।
क्या पायलट को मिलेगी ड्राइविंग सीट ?
राहुल गांधी की ओर से सब्र रखने के उदाहरण में सचिन पायलट का जिक्र आने के बाद अब उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू होने लगी है। सियासी गलियारों में यह बात होने लगी है कि राहुल गांधी के मित्रवत बयान ने यह साफ कर दिया है कि पायलट को आने वाले दिनों उनके ओर से रखे गए धैर्य़ (सब्र) की सौगात मिल सकती है, हालांकि यह दिन कब आएगा, यह देखने वाली बात है। सवाल ये भी कि जिस सब्र की तारीफ राहुल गांधी कर रहे है वो मौजूदा परिस्थितियों में कब तक कायम रह पाता है। राजस्थान के सीएम अशोक गेहलोत अपने – जादूई – प्रदर्शन से लगातार कांग्रेस हाईकमान के करीबी बने हुए है। पार्टी के ज्यादातर विधायक भी उनके साथ ही नज़र आ रहे है। ऐसे में राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने की बाट जोह रहे सचिन पायलट का सब्र का फल मीठा होता है या नही ये ना केवल सचिन पायलट के लिये बल्कि कांग्रेस पार्टी के भविष्य़ के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। indiafirst.online