ताइवान को लेकर आमने-सामने अमेरिका और चीन, क्या शुरू होने वाला है तीसरा विश्वयुद्ध?

इंडिया फ़र्स्ट । 

वॉशिंगटन/पेइचिंग,  चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को फिर से अपने देश का हिस्सा बनाने की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि ताइवान सवाल को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा और इसका शांतिपूर्वक एकीकरण ही दोनों देशों के हित में है। उन्होंने अमेरिका को इशारों-इशारों में धमकाते हुए कहा कि ताइवान के मुद्दे पर किसी भी तरह का विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। अभी दो दिन पहले ही ऐसी रिपोर्ट आई थी कि अमेरिकी सेना के स्पेशल कमांडो ताइवान में मौजूद हैं और ताइवानी सेना को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

लगातार ताइवान में घुस रहे चीनी लड़ाकू विमान

पिछले 1 अक्टूबर यानी चीन के राष्ट्रीय दिवस के दिन चीनी वायु सेना के 25 लड़ाकू विमान, बॉम्बर्स और दूसरे एयरक्राफ्ट्स ने ताइवानी वायु सीमा का उल्लंघन किया था। हद तो तब हो गई जब कुछ पहले चीन के 56 विमानों के एक साथ ताइवानी सीमा में प्रवेश किया। यह ताइवान में चीनी लड़ाकू विमानों की सबसे बड़ी घुसपैठ थी। इस दौरान ताइवानी वायु सेना के विमानों की चीन के लड़ाकू विमानों से आमना-सामना भी हुआ।

अमेरिका ने भी ताइवान पर चीन को चेतावनी दी

ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका भी चुप नहीं बैठा और उसने चीन को साफ-साफ चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा कि चीन की उत्तेजक सैन्य गतिविधि ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता” को कमजोर कर दिया है। इसके बावजूद चीन ने अपनी हरकतें जारी रखीं। चीन ने भी अमेरिका को ताइवान को कोई भी सैन्य हथियार बेचने और ट्रेनिंग देने से बचने को कहा है। इसके पहले भी चीन कई बार अमेरिका को आग से न खेलने की चेतावनी दे चुका है

ताइवान के चारों ओर तेजी से बदल रहे हालात

जैसे-जैसे चीन और ताइवान में टकराव तेज हो रहा है, वैसे-वैसे इलाके की शांति और स्थिरता को खतरा भी बढ़ रहा है। ताइवान के चारों ओर शक्ति संतुलन भी तेजी से बदल रहा है। इससे दशकों से चले आ रहे गतिरोध का भविष्य और खतनाक दिखाई देने लगा है। चीन के साम्यवादी शासकों की एकीकरण मांगों के खिलाफ 70 से अधिक वर्षों से विरोध का झंडा बुलंद किया ताइवान अब चीन और अमेरिका के बीच गहरी कलह के केंद्र के रूप में उभरा है।

एशिया में घट रही अमेरिका की सैन्य ताकत

अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनी रसेल ने कहा कि रिश्ते में तारों पर बहुत कम इन्सुलेशन बचा है। मतलब इससे पैदा हुई चिंगारी कभी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है। बस एक छोटी सी हरकत से दोनों देशों के बीच भयानक युद्ध भड़क सकता है। चीनी सेना ने खुलकर ताइवान पर हमला करने और उसपर कब्जा करने की बाद को दोहराया है। अमेरिका ताइवान के ऊपर होने वाले किसी भी हमले को विफल करना चाहता है। लेकिन, वह जानता है कि एशिया में उसकी सैन्य शक्ति लगातार कमजोर हो रही है।

ताइवान बोला- चीन ने हमला किया तो तबाही मचेगी

ताइवान ने भी अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी साल में ताइवान ने अमेरिका से अरबों डॉलर के हथियार खरीदे थे। जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद भी ताइवान ने अमेरिका से कई तरह के नए हथियारों को खरीदा है। कुछ दिन पहले ही ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने कहा था कि अगर ताइवान पर हमला हुआ तो भयानक तबाही मचेगी। माना जा रहा है कि उन्होंने चीन को सख्त संदेश देने की कोशिश की है।

सत्ता पाने के लिए ताइवान पर हमला कर सकते हैं जिनपिंग

चीन के अति महत्वकांक्षी नेता शी जिनपिंग अबतक के इतिहास में देश की सबसे शक्तिशाली सेना का नेतृत्व कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि 2022 में अपने तीसरे कार्यकाल को पाने के लिए शी जिनपिंग नई चाल चल रहे हैं। वो जानते हैं कि अगर ताइवान को चीन में मिला लिया जाता है तो उनको व्यापक जनसमर्थन हासिल होगा। इतना ही नहीं, चीन में उन्हें माओत्से तुंग के बाद दूसरा सबसे मजबूत नेता भी माना जाता है।  indiafirst.online

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