Constitution Day पर बोले PM मोदी’ भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है’

इंडिया फ़र्स्ट ।

26 नवंबर को संविधान दिवस (Constitution Day) मनाया जा रहा है। मुख्य आयोजन संसद भवन के सेंट्रल हॉल में हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। आयोजन में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री, सांसद और अन्य गणमान्य शामिल हुए। राष्ट्रपति ने जनता से अपने अपने घर से कोविड 19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उनके साथ-साथ संविधान की प्रस्तावना पढ़ने का अनुरोध किया था। राष्ट्रपति ने संविधान सभा की चर्चाओं का डिजिटल संस्करण जारी किया और संवैधानिक लोकतंत्र पर आधारित ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी का शुभारंभ किया।

मोदी ने जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा-आज का दिवस इस सदन को प्रणाम करने का है। इसी पवित्र जगह पर महीनों तक भारत के एक्टिविस्टों ने देश के उज्जवल भविष्य के लिए व्यवस्थाओं को निर्धारित करने के लिए मंथन किया था और संविधान रुपी अमृत हमें प्राप्त हुआ। भारत एक ऐसे संकट की तरफ़ बढ़ रहा है, जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है, लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय है और वह है पारिवारिक पार्टियां।

महात्मा गांधी जी ने जो कर्तव्य के बीज बोए थे, आजादी के बाद वो वट वृक्ष बन जाने चाहिए थे। लेकिन दुर्भाग्य से शासन व्यवस्था ऐसी बनी कि उसने अधिकार, अधिकार की बाते करके लोगों को एक अवस्था में रखा कि ‘हम हैं तो आपके अधिकार पूरे होंगे’। महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में आधिकारों को लिए लड़ते हुए भी, कर्तव्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की थी। अच्छा होता अगर देश के आजाद होने के बाद कर्तव्य पर बल दिया गया होता। संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है, संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो देते हैं। जो दल स्वयं लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं।

22 मिनट के भाषण में विपक्ष पर कहीं ये बातें

प्रधानमंत्री ने 22 मिनट अपना भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने नेशन फर्स्ट का जिक्र किया। उन्होंने चिंता जताई कि राजनीति के चलते देशहित पीछे छूट गया। मोदी ने परिवारवाद पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक ही परिवार का पार्टी चलाना देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है। मोदी ने भ्रष्टाचार पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का महिमामंडन नए लोगों को इसी रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा-भारतीय संविधान मात्र क़ानूनी मार्गदर्शन की व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक आर्थिक परिवर्तन का दस्तावेज भी है। संविधान का निर्माण करने वाले महान संविधान मनुष्यों को मैं नमन करता हूं।

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