#PAKISTAN IN BIG TROUBLE -आईएमएफ ने , पाकिस्‍तान से किया किनारा, क्‍या डिफॉल्‍ट होगा जिन्‍ना का देश?

इंडिया फर्स्ट। इस्लामाबाद।

• IMF की तरफ से श्रीलंका को राहत पैकेज मिलने के बाद पाकिस्‍तान में हलचल है
• श्रीलंका को तुरंत करीब 330 मिलियन डॉलर की राहत भेजी जा रही है
• पाकिस्‍तान को भी पिछले कई महीनों से बेलआउट पैकेज का इंतजार है

आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका को अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की तरफ से तीन अरब डॉलर का राहत पैकेज देने का ऐलान किया गया तो पाकिस्‍तान में हलचल मच गई। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि श्रीलंका को तुरंत करीब 330 मिलियन डॉलर की राहत भेजी जा रही है। अब पाकिस्‍तान में लोग सवाल कर रहे हैं कि जब यह मुल्‍क भी श्रीलंका की ही तरह आर्थिक संकट से जूझ रहा है तो फिर इसे बेलआउट पैकेज क्‍यों नहीं मिल पा रहा है। पाकिस्‍तान को पिछले कई महीनों से बेलआउट पैकेज का इंतजार है। मगर इस देश पर आईएमएफ कोई भी फैसला नहीं ले रहा है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या यह देश कंगाली या दिवालिया होने की तरफ बढ़ रहा है।

साल 2016 से ही खराब हालात
साल 2016 से 2022 तक, इन सात सालों पर अगर नजर डालें तो पता लगता है कि पाकिस्‍तान का चालू खाता घाटा 74.5 अरब डॉलर था। जबकि इन सात सालों के दौरान स्टेट बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार 3.6 अरब डॉलर तक गिर गया। इसका मतलब साफ है कि पाकिस्‍तान को 70.0 अरब डॉलर के वित्‍तीय मदद की जरूरत है। वहीं उसने 65 अरब डॉलर का कर्ज लिया हुआ है। विदेशी निवेश इतना नहीं है कि वह घाटे को कम कर सकता। ऐसे में सरकार को आर्थिक मदद मांगना ही बेहतर लगा। विदेशी लेनदार पाकिस्‍तान को और कर्ज नहीं देना चाहते थे। इसका नतीजा था कि पाकिस्तान का बाहरी सेक्‍टर अस्थिर हो गया है।


खाई में पहुंचा पाकिस्‍तान
देश के कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत बहुत अच्‍छी अर्थव्‍यवस्‍था नहीं थे। लेकिन इन देशों के पास अर्थव्‍यवस्‍था के ऐसे जानकार थे जो हर बात से वाकिफ थे। आज हकीकत यह है कि ये देश वर्ल्‍ड लीडर्स बन चुके हैं। पाकिस्‍तान के साथ ऐसी उम्‍मीद करना भी बेमानी है। उनका कहना है कि देश का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा से खराब रहा है। हमेशा कर्ज लेकर आगे बढ़ने की नीति ने सबकुछ बिगाड़ दिया है। वो मानते हैं कि पाकिस्‍तान इस समय ऐसी खाई में है जहां से वह लंगड़ाते हुए ही स्थिरता की तरफ बढ़ सकता है। सात सालों में ऐसा कुछ नहीं हुआ है जो स्थिति को बेहतर कर सके। indiafirst.online

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