Covid-19 : अनुकम्पा नियुक्ति में 5 वर्ष की छूट , शिवराज केबिनेट क फैसला

इंडिया फ़र्स्ट । मध्यप्रदेश में कोविड से मरने वाले कर्मचारियों के लिए शिवराज कैबिनेट ने मंगलवार को योजना को कुछ संशोधन के साथ मंजूरी दे दी है। अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए आयु सीमा का बंधन हटा लिया गया है।

मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि समान्य प्रशासन विभाग ने योजना के प्रस्ताव में अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र पत्नी के लिए आयु सीमा का बंधन समाप्त करने तथा पुरुष के लिए मौजूदा अनुकंपा नियम में तय आयु सीमा में 5 साल की छूट देने का प्रावधान किया था। लेकिन बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष परिस्थितियों के लिए छूट देना जरूरी है। इसलिए पुरुषों के लिए बंधन को हटाया जाए। यानी अब इस योजना के तहत अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले की उम्र 55 साल भी है तो उसे नौकरी पर लिया जाएगा।

बता दें कि प्रदेश में 29 सितंबर 2014 को संशोधित अनुकंपा नियुक्ति के नियम लागू किए थे। इसके मुताबिक सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 साल तय है, जबकि अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 5 और पिछड़ा वर्ग के आवेदक के लिए 3 साल की छूट का प्रावधान है। हर वर्ग की महिलाओं के लिए 5 साल की छूट का प्रावधान है, लेकिन कोविड 19 अनुकंपा नियुक्ति योजना में आयु का बंधन नहीं रहेगा।

योजना का लाभ सभी नियमित, स्थाई कर्मचारी, कार्यभारित और आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले, दैनिक वेतन भोगी, संविदा, कलेक्टर दर पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसी तरह कोविड-19 विशेष अनुग्रह योजना के तहत पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। यह राशि उनके परिवार का संबल बनेगी। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, कोटवार भी योजना में शामिल होंगे।

सीएम ने कहा- योजना की अवधि बढ़ाएं
सामान्य प्रशासन विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति योजना एक मार्च 2021 से 30 जून 2021 तक ही लागू रखने का प्रावधान प्रस्तावित किया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इस अवधि को बढ़ाया जाए।

334 शिक्षकों की कोरोना से हो चुकी है मौत
प्रदेश में शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षक समेत 366 लोगों की कोराेना से मौत हो चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा 334 शिक्षकों की संख्या है। साथ ही 19 कर्मचारी, 11 प्राचार्य और 2 अधिकारी शामिल हैं। वहीं, कोरोना संक्रमितों में भी 1809 में से 1633 शिक्षक कोरोना संक्रमित हैं। साथ ही 80 प्राचार्य, 73 कर्मचारी व 23 अधिकारी शामिल हैं।​​​​​

35 बिजली और 88 पुलिसकर्मियों की जान गई
जानकारी अनुसार कोरोना से 35 बिजली कर्मियों व 88 पुलिस कर्मियों की मौत हो चुकी है। राज्य मंत्रालय में ही अब तक 148 अधिकारियों और कर्मचारियों की मौत कोरोना के कारण हो चुकी है। इसके अलावा अन्य विभागों में कई अधिकारी व कर्मचारी जान गंवा चुके हैं।

मंडी के संविदा कर्मचारियों के लिए 25 लाख का प्रावधान
कोरोना महामारी को देखते हुए मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मंडी बोर्ड और मंडी समितियों के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए पहले ही निर्णय ले लिया है। इसके तहत प्रदेश की विभिन्न कृषि उपज मंडियों में कार्यरत और मंडी बोर्ड के अधिकारियों व कर्मचारियों की यदि कोरोना से मृत्यु होती है, तो उनके आश्रित परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में 25 लाख रुपए दिए जाएंगे। मंडी समितियों में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही संविदा कर्मचारियों को शामिल किया गया है। बता दें कि मंडी के 31 अधिकारियों व कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है।

18 हजार मामले लंंबित
मध्य प्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति के करीब 18 हजार मामले लंबित पड़े हैं। हालांकि सरकार ने हाल ही में इसके नियमों में कई बदलाव किए हैं। इसमें 7 साल की वैधता ख़त्म करने, रिक्त पड़े आरक्षित पदों में सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों की भर्ती जैसे नियम शामिल हैं।

यह प्रस्ताव भी स्वीकृत हुए

  • लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 25% पद सीधी भर्ती से और 75% पद पदोन्नति से भरे जाएंगे।
  • प्रदेश के 50 पर्यटन केंद्रों को महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से चयनित किया जाएगा। इसके साथ ही महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
  • कोरोना की पहली लहर से निपटने के लिए 883 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। यह राशि कोरोना की जांच, लेब, पलायन कर आने वाले मजदूरों के अस्थाई शिविरों व अन्य व्यवस्था में खर्च किए गए थे। राजस्व विभाग के प्रस्ताव पर सरकार ने इस खर्च पर मंजूरी दे दी है। indiafirst.online

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