IndiaFirst.Online : पटाखों पर सुप्रीम फ़टकार,कहा जीवन जीने का अधिकार, रहे बरक़रार

इंडिया फ़र्स्ट ।

पटाखो को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी सामने आई है सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख़ तेवर में कहा की चुनाव जीतने में भी आतिशबाजी की जाती है वहीँ शादी समारोह व विभिन्न त्योहारों पर भी पटाखों का इस्तेमाल होता रहा है। इसके लिए देश में कानून मौजूद है लेकिन इसका पालन नहीं कराया जाता।

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जिन लोगों के पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पालन कराने की ज़िम्मेदारी है वही लोग इसका पालन नहीं कर रहे है , पटाखों पर रोक की बात पर लॉगऑन के रोज़गार वाले तर्क का जवाब देते हुए कहा, की रोज़गार की आड़ में आप नागरिकों के जीवन का अधिकार नहीं छीन सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा लोगों का जीवन जीने का अधिकार बना रहे यही हमार मुख्य उद्द्देश्य है, साथ ही ग्रीन पटाखों पर एक्सपर्ट की मंज़ूरी के बाद विशेष आदेश की बात भी कोर्ट ने कही

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पटाखों के निर्माता संघ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि दिवाली चार नवंबर को है और वे चाहते हैं कि पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) पटाखों को लेकर एक निर्णय ले, उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर फैसला करना चाहिए क्योंकि पटाखा उद्योग में लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। अदालत में बहस के दौरान नाडकर्णी की तरफ से दलील दे रहे शंकरनारायण को रोकने पर पीठ ने मजाक में कहा, हम नहीं चाहते कि अदालत कक्ष के अंदर कोई पटाखा फूटे। हर किसी को बात कहने का मौका मिलेगा। हम भी पटाखों से डरता हूं। इस पर शंकरनारायण ने कहा, मीलॉर्ड, हम यकीन दिलाते हैं कि अदालत में कोई पटाखा नहीं फूटेगा, केवल काम होगा . सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमें रोजगार, बेरोजगारी और नागरिक के जीवन के अधिकार के बीच संतुलन बनाना होगा। कुछ लोगों के रोजगार की आड़ में हम अन्य नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दे सकते .

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